हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, आयतुल्लाहिल उज़्मा नूरी हमदानी ने सिपाह हज़र अली इब्न अबि तालिब (अ) के कमांडर सरदार जमीरी से मुलाक़ात मे सशस्त्र फोर्स की चतुराई और दंगा व फ़साद को असफल बनाने के प्रयासो की सराहना करते हु एकहा सशस्त्र फ़ोर्स ने बलिदान और अत्यंत चतुराई का सबूत देते हुए देश मे दंगाईयो और फ़सादीयो की निंदनीय प्रयासो मे सफ़ल नही होने दिया।
उन्होने कहा आज दुशमन चाहे वह उपनिवेशवाद हो या महाज़े क़ुफ्र, सब एक हो चुके है और वह सब ईरान के विकास और इक्तेदार से भयभीत है अतः ईरान ने अपने तई विभाजित करने और टुक्ड़े टुक्डे करने के दर पर है।
इस मरजा ए तकलीद ने समंजस और एकता के महत्व पर ज़ोर देते हुए आगे कहा जोभी मतभेद और दंगाे उत्पन्न करे और लोगो मे इंतेशार फ़ैलाए वह दुशमन का गुर्गा है। आज हम सबको एकता और एकजुटता की सबसे अधिक ज़रूरत है क्योकि एकता और एकजुटता से ताकतवर कोई हथियार नही है।
आयतुल्लाहिल उज़्मा नूरी हमादानी ने कहा दुशम हमारी जिस ताकत से सर्वाधिक भय खाता है वह हमारी एकता और एकजुटता है। इसी कारण सुप्रीम लीडर ने भी एकता पर बहुत अधिक बल दिया और इमाम खुमानी (र) की ताबीर के अनुसार भी इस्लामी क्रांति मे सफलता की असली कुंजी हमारा आपसी समंजस ही था।
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